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मैं और मेरा खुदा

 किसी से क्यों कहें हमने क्या खोया क्या पाया है ज़िंदगी मे

कोई कौन होता है मेरे और खुदा के दरमियाँ आने वाला

मैं तो बस मानता रहा हर कही इस दिल की

खुदा ही तो था कभी सब छिनने तो कभी सब देने वाला

नही बदल पाया कभी मैं, ज़ो लिखा था उसने

कुछ माथे तो कुछ हाथों की लकीरों में

वही है जिसने भेजा था ज़मीन पर सासें देकर

और वही होगा एक दिन मुझे मौत देने वाला

एक कविता और लिख लेने दो

अभी तो हूँ मैं ख्वाओं में कुछ देर मुझे और सोने दो

चंद लम्हे ही सही इस ज़ीवन के हंस के तो जी लेने दो.

कल क्या हो किसने जाना, आखों मे ये नींद भी हो ना हो

सर पर हो आसमां और उसमें झिलमिल सितारे हो ना हो

ओस के जैसे मुझको भी बादलों पर तो उड़ लेने दो

इन ताज़ी बहती हवाओं को सीने मे तो भर लेने दो

ना जाओ, अभी ठहरो तुमसे मुझे कुछ कहना है

दिल मे दबी सारी बातें होठों से तो कह लेने दो

मत रोको मेरे हाथों को जब तब इनमे दम है बाकी

जाते जाते भी मुझको एक कविता और लिख लेने दो