एक कविता और लिख लेने दो

अभी तो हूँ मैं ख्वाओं में कुछ देर मुझे और सोने दो

चंद लम्हे ही सही इस ज़ीवन के हंस के तो जी लेने दो.

कल क्या हो किसने जाना, आखों मे ये नींद भी हो ना हो

सर पर हो आसमां और उसमें झिलमिल सितारे हो ना हो

ओस के जैसे मुझको भी बादलों पर तो उड़ लेने दो

इन ताज़ी बहती हवाओं को सीने मे तो भर लेने दो

ना जाओ, अभी ठहरो तुमसे मुझे कुछ कहना है

दिल मे दबी सारी बातें होठों से तो कह लेने दो

मत रोको मेरे हाथों को जब तब इनमे दम है बाकी

जाते जाते भी मुझको एक कविता और लिख लेने दो

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5 Commentsto एक कविता और लिख लेने दो

  1. rishi says:

    Very well written my dear poet..beautiful lines

  2. deepti says:

    kya likhte ho yaar..1 dum mast :)

  3. abha says:

    nicely done.. u write good!

  4. Simi says:

    To be very frank, I have never commented on Blogs before…and I still hesitate before commenting on a Blog unless there is something that really moves me to comment. ..
    Each and every word defines a new meaning, it gives a depth understanding of a human’s desire and the way he perceives his own life..
    Great work ! Just Loved It :)

  5. Sanjana says:

    Very nice

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