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मैं और मेरा खुदा

 किसी से क्यों कहें हमने क्या खोया क्या पाया है ज़िंदगी मे

कोई कौन होता है मेरे और खुदा के दरमियाँ आने वाला

मैं तो बस मानता रहा हर कही इस दिल की

खुदा ही तो था कभी सब छिनने तो कभी सब देने वाला

नही बदल पाया कभी मैं, ज़ो लिखा था उसने

कुछ माथे तो कुछ हाथों की लकीरों में

वही है जिसने भेजा था ज़मीन पर सासें देकर

और वही होगा एक दिन मुझे मौत देने वाला

एक कविता और लिख लेने दो

अभी तो हूँ मैं ख्वाओं में कुछ देर मुझे और सोने दो

चंद लम्हे ही सही इस ज़ीवन के हंस के तो जी लेने दो.

कल क्या हो किसने जाना, आखों मे ये नींद भी हो ना हो

सर पर हो आसमां और उसमें झिलमिल सितारे हो ना हो

ओस के जैसे मुझको भी बादलों पर तो उड़ लेने दो

इन ताज़ी बहती हवाओं को सीने मे तो भर लेने दो

ना जाओ, अभी ठहरो तुमसे मुझे कुछ कहना है

दिल मे दबी सारी बातें होठों से तो कह लेने दो

मत रोको मेरे हाथों को जब तब इनमे दम है बाकी

जाते जाते भी मुझको एक कविता और लिख लेने दो

The White Tiger – Aravind Adiga

What to say about a book which has already proved itself by winning most prestigious award, Booker Man Prize for 2008. The book was not in the lime light before it was nominated for the award, and the reason was the author Aravind Adiga who is very new as an author. This is his first book which is got published. He is now among very few Indian authors who won this award.

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This is a story about a simple boy Balram Halwai from Bihar, about his struggle, dreams, failure, success and crimes. How he changed his life and became an employer from a servant. Read More…